"मैनाठेर फैसले के बाद सियासत तेज: भाजपा, सपा और कांग्रेस आमने-सामने"
Politics Heats Up Following Mainather Verdict
भाजपा ने रिपोर्ट तलब कर सपा पर साधा निशाना, सजा के बाद मैनाठेर पर सियासी बहस हुई तेज
मुरादाबाद। Politics Heats Up Following Mainather Verdict, मैनाठेर बवाल में 16 लोगों को उम्रकैद की सजा होने के बाद सियासत भी गरमा गई है। अदालत के फैसले ने 15 साल पुराने मामले को फिर जिंदा कर दिया है और अब यह सिर्फ न्यायिक मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकतों के बीच नया रणक्षेत्र बनता जा रहा है। भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों दल इस फैसले के बहाने अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।
यह घटना छह जुलाई 2011 को हुई थी। प्रदेश में उस समय बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी। तब मैनाठेर का नाम पूरे प्रदेश में गूंजा था। घटना में कुल छह मुकदमे लिखे गए। बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार में इस बवाल से जुड़े तीन मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी थी।
एक मुकदमा सियासी पैरवी के चलते वापस भी ले लिया गया। अब सिर्फ एक मुकदमे में फैसला आया है, जिसमें आठ गांवों के 16 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। फैसले के बाद भाजपा ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने के संकेत दे दिए हैं। जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने पुष्टि की है कि पार्टी हाईकमान ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।
अंदरखाने यह भी चर्चा है कि बंद हो चुके मुकदमों की फाइलें फिर से खोली जा सकती हैं। भाजपा इस फैसले को न्याय बनाम राजनीति के नैरेटिव में बदलकर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
वहीं समाजवादी पार्टी इस पूरे घटनाक्रम में बैकफुट पर नजर आ रही है। सपा के शासनकाल में जिन मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई थी, वही अब सियासी निशाने पर हैं। भाजपा इसे सपा सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते नरमी बताकर हमला बोलने की तैयारी में है, जिससे आने वाले दिनों में सपा की घेराबंदी और तेज हो सकती है।
इधर, कांग्रेस ने इस सियासी लड़ाई में अलग मोर्चा खोलते हुए प्रशासनिक जवाबदेही को मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद गुम्बर ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तत्कालीन जिलाधिकारी राजशेखर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बवाल के दौरान तत्कालीन डीआइजी अशोक कुमार को भीड़ के बीच मरणासन्न हालत में छोड़ दिया गया था, जो गंभीर प्रशासनिक चूक थी।
उन्होंने अदालत में दिए बयान में यह बात कही है कि डीएम उन्हें छोड़कर भाग गए थे। कांग्रेस का कहना है कि अदालत में दर्ज बयानों में भी इस लापरवाही का जिक्र है। पार्टी इस मुद्दे को जिम्मेदारी बनाम चूक के तौर पर उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय द्वारा लखनऊ में रिपोर्ट तलब किए जाने से यह साफ है कि कांग्रेस इसे प्रदेश स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। अजय राय ने इस मामले की रिपोर्ट के साथ सोमवार को जिलाध्यक्ष को लखनऊ बुलाया है।
दरअसल, मैनाठेर बवाल का यह फैसला अब सियासत की नई बिसात बन चुका है, जहां हर दल अपने हिसाब से चाल चल रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा न्याय की सीमा में रहता है या पूरी तरह राजनीतिक हथियार बनकर चुनावी माहौल को भी प्रभावित करता है।